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श्लोक 6.7.40  |
यया गुप्त: सहस्राक्षो जिग्येऽसुरचमूर्विभु: ।
तां प्राह स महेन्द्राय विश्वरूप उदारधी: ॥ ४० ॥ |
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| अनुवाद |
| अत्यन्त उदार विश्वरूप ने राजा इन्द्र (सहस्राक्ष) को वह गोपनीय स्तोत्र सुनाया जिसकी सहायता से इन्द्र की रक्षा हुई और असुरों की सेना की शक्ति जीती गयी। |
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| अत्यन्त उदार विश्वरूप ने राजा इन्द्र (सहस्राक्ष) को वह गोपनीय स्तोत्र सुनाया जिसकी सहायता से इन्द्र की रक्षा हुई और असुरों की सेना की शक्ति जीती गयी। |
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| इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध छह के अंतर्गत सातवाँ अध्याय समाप्त होता है । |
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