Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 6.7.26: श्रील शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा - इस प्रकार श्री ब्रह्मा के निर्देशों एवं अपनी चिंता से मुक्त होकर सभी देवता त्वष्टा के पुत्र विश्वरूप ऋषि के पास गए। हे राजन! उन्होंने विश्वरूप को गले लगा लिया और इस प्रकार उनसे बोले।   |   bhagavat अध्याय 6.7: इन्द्र द्वारा गुरु बृहस्पति का अपमान   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 7: इन्द्र द्वारा गुरु बृहस्पति का अपमान  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.7.26 
श्रीशुक उवाच
त एवमुदिता राजन् ब्रह्मणा विगतज्वरा: ।
ऋषिं त्वाष्ट्रमुपव्रज्य परिष्वज्येदमब्रुवन् ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
श्रील शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा - इस प्रकार श्री ब्रह्मा के निर्देशों एवं अपनी चिंता से मुक्त होकर सभी देवता त्वष्टा के पुत्र विश्वरूप ऋषि के पास गए। हे राजन! उन्होंने विश्वरूप को गले लगा लिया और इस प्रकार उनसे बोले।
 
Srila Sukadeva Goswami further said that thus ordered by Sri Brahma and relieved of their worries, all the gods went to Vishwaroop Rishi, the son of Tvashta. O King! They embraced Vishwaroop and spoke thus.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)