यस्य प्रसादाद्भगवत्-प्रसादो
यस्याप्रसादान्न गति: कुतोऽपि
"आध्यात्मिक गुरु की कृपा से भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। आध्यात्मिक गुरु की कृपा के बिना, कोई भी प्रगति नहीं कर सकता।" यद्यपि राक्षस भगवान ब्रह्मा की तुलना में तुच्छ हैं, लेकिन अपने गुरु की शक्ति के कारण वे इतने शक्तिशाली थे कि वे भगवान ब्रह्मा से ब्रह्मलोक का हरण भी कर सकते थे। इसलिए हम आध्यात्मिक गुरु से प्रार्थना करते हैं:
मूकं करोति वाचालं
पंगुं लंघयते गिरिं
यत्-कृपा तमहं वन्दे
श्री-गुरुं दीन-तारणं
(मध्य 17.80)
गुरु की कृपा से, एक गूंगा व्यक्ति भी सबसे बड़ा वक्ता बन सकता है, और एक लंगड़ा व्यक्ति भी पहाड़ों को पार कर सकता है। जैसा कि भगवान ब्रह्मा द्वारा सलाह दी गई है, यदि कोई अपने जीवन में सफलता चाहता है तो उसे इस शास्त्रीय नियम को याद रखना चाहिए।
