Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 6.7.20: जब सर्वशक्तिशाली ब्रह्माजी ने देवताओं को देखा, उनके शरीर राक्षसों के बाणों से बुरी तरह घायल थे, तो उन्होंने अपनी असीम दया से उन्हें सांत्वना दी और इस प्रकार कहा।   |   bhagavat अध्याय 6.7: इन्द्र द्वारा गुरु बृहस्पति का अपमान   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 7: इन्द्र द्वारा गुरु बृहस्पति का अपमान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.7.20 
तांस्तथाभ्यर्दितान्वीक्ष्य भगवानात्मभूरज: ।
कृपया परया देव उवाच परिसान्त्वयन् ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
जब सर्वशक्तिशाली ब्रह्माजी ने देवताओं को देखा, उनके शरीर राक्षसों के बाणों से बुरी तरह घायल थे, तो उन्होंने अपनी असीम दया से उन्हें सांत्वना दी और इस प्रकार कहा।
 
When the most powerful Lord Brahma saw the gods coming towards him, badly wounded by the arrows of the demons, he consoled them by his causeless mercy and spoke thus.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)