Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.7.19: असुरों के धारदार बाणों से देवताओं के मस्तक, जंघाएँ, बाहें और शरीर के अन्य अंगों में चोटें आईं। इन्द्र के नेतृत्व में देवताओं के पास कोई उपाय न देखकर सिर झुकाकर तुरंत उचित आदेश और शरण लेने के लिए भगवान ब्रह्मा के पास जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। | bhagavat अध्याय 6.7: इन्द्र द्वारा गुरु बृहस्पति का अपमान । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तैर्विसृष्टेषुभिस्तीक्ष्णैर्निर्भिन्नाङ्गोरुबाहव: ।
ब्रह्माणं शरणं जग्मु: सहेन्द्रा नतकन्धरा: ॥ १९ ॥
अनुवाद
असुरों के धारदार बाणों से देवताओं के मस्तक, जंघाएँ, बाहें और शरीर के अन्य अंगों में चोटें आईं। इन्द्र के नेतृत्व में देवताओं के पास कोई उपाय न देखकर सिर झुकाकर तुरंत उचित आदेश और शरण लेने के लिए भगवान ब्रह्मा के पास जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।
When the heads, thighs, arms and other body parts of the gods were mutilated by the sharp arrows of the demons, then all the gods including Indra, seeing no other solution, bowed down and immediately went to Lord Brahma to seek refuge and get appropriate orders.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥