य: पारमेष्ठ्यं धिषणमधितिष्ठन्न कञ्चन ।
प्रत्युत्तिष्ठेदिति ब्रूयुर्धर्मं ते न परं विदु: ॥ १३ ॥
अनुवाद
यदि कोई यह कहता है कि राजा के ऊंचे सिंहासन पर बैठा हुआ व्यक्ति दूसरे राजा या ब्राह्मण के सम्मान में खड़ा नहीं होना चाहिए, तो यही समझना चाहिए कि वह श्रेष्ठ धार्मिक नियमों को नहीं जानता है।
If someone says that a person sitting on the high throne of a king should not stand up to greet another king or a Brahmin, then it should be understood that he does not know the best religious rules.
तात्पर्य
इस विषय में श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर कहते हैं कि जब कोई राष्ट्रपति या राजा अपने सिंहासन पर बैठता है, तो उसे अपनी सभा में आने वाले हर व्यक्ति के प्रति सम्मान दिखाने की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन उन्हें अपने आध्यात्मिक गुरु, ब्राह्मणों और वैष्णवों जैसे वरिष्ठों के प्रति सम्मान दिखाना होगा। वह कैसे कार्य करे, उसके कई उदाहरण हैं। जब भगवान कृष्ण अपने सिंहासन पर बैठे हुए थे और नारद सौभाग्य से उनकी सभा में आए, तो भगवान कृष्ण भी अपने अधिकारियों और मंत्रियों के साथ तुरंत खड़े हो गए और नारद को सम्मानपूर्वक प्रणाम किया। नारद जानते थे कि कृष्ण भगवान के परम व्यक्तित्व हैं और कृष्ण को पता था कि नारद उनके भक्त हैं, लेकिन हालांकि कृष्ण सर्वोच्च भगवान हैं और नारद भगवान के भक्त हैं, भगवान ने धार्मिक शिष्टाचार का पालन किया। चूंकि नारद ब्रह्मचारी, ब्राह्मण और एक श्रेष्ठ भक्त थे, यहाँ तक कि कृष्ण ने भी राजा के रूप में कार्य करते हुए, नारद को अपनी प्रणामी श्रद्धांजलि दी। वैदिक सभ्यता में ऐसा ही आचरण स्पष्ट है। एक सभ्यता जिसमें लोग यह नहीं जानते कि नारद और कृष्ण के प्रतिनिधि का सम्मान कैसे किया जाए, समाज का निर्माण कैसे किया जाए और कृष्ण भावना में कैसे उन्नति की जाए - एक ऐसा समाज जो हर साल केवल नई कारों और नए गगनचुंबी भवनों के निर्माण का संबंध रखता है और फिर उन्हें टुकड़े-टुकड़े कर देता है और नए बनाता है - वह तकनीकी रूप से उन्नत हो सकता है, लेकिन एक मानव सभ्यता नहीं है। एक मानवीय सभ्यता उन्नत होती है जब उसके लोग चातुर्वर्ण प्रणाली का पालन करते हैं, जीवन के चार आदेशों की प्रणाली। सलाहकार के रूप में कार्य करने के लिए आदर्श, प्रथम श्रेणी के आदमी होने चाहिए, प्रशासकों के रूप में कार्य करने के लिए द्वितीय श्रेणी के आदमी, भोजन का उत्पादन करने और गायों को बचाने के लिए तृतीय श्रेणी के पुरुष और चतुर्थ श्रेणी के पुरुष जो समाज के तीनों उच्च वर्ग का पालन करते हैं। जो व्यक्ति समाज की मानक प्रणाली का पालन नहीं करता है, उसे पाँचवें श्रेणी का व्यक्ति माना जाना चाहिए। वैदिक कानून और विनियमों के बिना एक समाज मानवता के लिए बहुत मददगार नहीं होगा। जैसा कि इस श्लोक में कहा गया है, धर्म ते न परम विदु: ऐसा समाज जीवन के उद्देश्य और धर्म के उच्चतम सिद्धांत को नहीं जानता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥