Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.7.10: स्वर्ग के राजा इंद्र ने अपनी भूल तुरंत ही समझ ली। यह महसूस करते हुए कि उन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु का अपमान किया है, उन्होंने सभा के सभी सदस्यों की उपस्थिति में अपनी निंदा की। | bhagavat अध्याय 6.7: इन्द्र द्वारा गुरु बृहस्पति का अपमान । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तर्ह्येव प्रतिबुध्येन्द्रो गुरुहेलनमात्मन: ।
गर्हयामास सदसि स्वयमात्मानमात्मना ॥ १० ॥
अनुवाद
स्वर्ग के राजा इंद्र ने अपनी भूल तुरंत ही समझ ली। यह महसूस करते हुए कि उन्होंने अपने आध्यात्मिक गुरु का अपमान किया है, उन्होंने सभा के सभी सदस्यों की उपस्थिति में अपनी निंदा की।
The King of Heaven Indra immediately realized his mistake. Knowing that he had disrespected his Guru, he himself reproached himself in front of all the members of that assembly.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥