vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् भागवतम
»
स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य
»
अध्याय 5: प्रजापति दक्ष द्वारा नारद मुनि को शाप
»
श्लोक 9
श्लोक
6.5.9
कथं स्वपितुरादेशमविद्वांसो विपश्चित: ।
अनुरूपमविज्ञाय अहो सर्गं करिष्यथ ॥ ९ ॥
अनुवाद
अफ़सोस! तुम्हारे पिता सर्वज्ञ हैं, पर तुम उनके असली हुक्म को नहीं जानते। अपने पिता के असली मकसद को जाने बिना तुम संतान कैसे पैदा करोगे?
Alas! Your Father is omniscient, but you do not know His real command. How will you produce children without knowing the real purpose of your Father?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×