श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 5: प्रजापति दक्ष द्वारा नारद मुनि को शाप  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  6.5.43 
तन्तुकृन्तन यन्नस्त्वमभद्रमचर: पुन: ।
तस्माल्लोकेषु ते मूढ न भवेद्भ्रमत: पदम् ॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
तुमने मेरे पुत्रों से मेरा वियोग करवाया और अब फिर वही अशुभ कार्य किया है। इसलिए तुम एक नीच हो जो यह नहीं जानते कि दूसरों के साथ किस तरह का व्यवहार करना चाहिए। तुम पूरे ब्रह्मांड में घूमते रहो, पर मैं तुम्हें शाप देती हूँ कि तुम्हारा कहीं भी कोई निवास न रहे।
 
You separated my sons from me once and now you have done the same evil deed again. So you are a rogue who does not know how to behave with others. Even though you keep roaming throughout the universe, I curse you that you will not have a place to live anywhere.
तात्पर्य
क्योंकि प्रजापति दक्ष गृहमेधी थे जो अब गृहस्थ जीवन में ही रहना चाहते थे, उन्हें लगा कि यदि नारद मुनि एक जगह पर नहीं रह सकते, और उन्हें दुनियाभर में यात्रा करनी पड़ी, तो उनके लिए यही सबसे बड़ी सजा होगी। दरअसल, प्रचार करने वालों के लिए इस प्रकार की सजा एक वरदान ही है। किसी भी प्रचारक को प्रव्राजकाचार्य- आचार्य या शिक्षक के तौर पर जाना जाता है, जो मानव समाज की भलाई के लिए सदैव यात्रा करते रहते हैं। प्रजापति दक्ष ने नारद मुनि को श्राप दिया था कि यद्यपि उन्हें पूरे ब्रह्मांड में भ्रमण करने की सुविधा प्राप्त है, फिर भी वे कभी भी एक जगह पर नहीं रह पाएँगे। नारद मुनि से परंपरा प्रणाली के क्रम में मैं भी शापित हो गया हूँ। यद्यपि मेरे पास ऐसे कई केंद्र हैं जो निवास के लिए उपयुक्त हो सकते हैं, फिर भी, मैं कहीं भी नहीं रह पाता, क्योंकि मुझे मेरे युवा शिष्यों के माता-पिता ने शापित किया है। जबसे कृष्ण चेतना आंदोलन आरम्भ हुआ है, तब से मैं पूरे विश्व में साल में दो या तीन बार भ्रमण करता हूँ, और यधपि जहाँ भी जाता हूँ वहाँ मेरे ठहरने के लिए सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराए जाते हैं, मैं कहीं भी तीन दिन या एक हफ़्ते से ज़्यादा नहीं रह पाता। मुझे अपने शिष्यों के माता-पिता द्वारा दिया गया यह श्राप कोई ऐसी बुरी बात नहीं लगती, लेकिन अब आवश्यक है कि मैं किसी एक जगह पर रहूँ और अपने इस और कार्य- श्रीमद भागवतम् के अनुवाद को पूरा करूँ। यदि मेरे युवा शिष्य, खासकर जिन्होंने सन्यास की दीक्षा ले ली है, पूरी दुनिया में यात्रा करने का कार्य अपने हाथ में ले लें, तो यह संभव है कि मैं इस श्राप को इन युवा प्रचारकों पर स्थानांतरित कर दूँ। तब मैं अनुवाद के काम के लिए एक जगह पर आराम से बैठ सकूँगा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)