श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 4: प्रजापति दक्ष द्वारा भगवान् से की गई हंसगुह्य प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.4.9 
अन्नं चराणामचरा ह्यपद: पादचारिणाम् ।
अहस्ता हस्तयुक्तानां द्विपदां च चतुष्पद: ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
प्राकृतिक रूप से फलों और फूलों को कीड़ों-पक्षियों का भोजन माना जाता है। बिना पैर वाले जीव जैसे कि घास इत्यादि गाय-भैंस जैसे चौपायों के भोजन हैं। जो पशु अपने अगले पैरों को हाथों की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकते, उन्हें बाघ जैसे पंजों वाले पशुओं का भोजन कहा जाता है। हिरण-बकरे जैसे चौपाये जानवर और खाद्यान्न भी मानवों के भोजन के लिए होते हैं।
 
प्राकृतिक रूप से फलों और फूलों को कीड़ों-पक्षियों का भोजन माना जाता है। बिना पैर वाले जीव जैसे कि घास इत्यादि गाय-भैंस जैसे चौपायों के भोजन हैं। जो पशु अपने अगले पैरों को हाथों की तरह इस्तेमाल नहीं कर सकते, उन्हें बाघ जैसे पंजों वाले पशुओं का भोजन कहा जाता है। हिरण-बकरे जैसे चौपाये जानवर और खाद्यान्न भी मानवों के भोजन के लिए होते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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