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श्लोक 6.4.7  |
न द्रुमेभ्यो महाभागा दीनेभ्यो द्रोग्धुमर्हथ ।
विवर्धयिषवो यूयं प्रजानां पतय: स्मृता: ॥ ७ ॥ |
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| अनुवाद |
| हे भाग्यशाली महानुभावों, तुम लोगों को इन दरिद्र वृक्षों को जलाकर उन्हें भस्म नहीं करना चाहिए। तुम लोगों का कर्तव्य है कि अपने नागरिकों (प्रजा) के लिए समस्त समृद्धि की कामना करो और उनके रक्षक के रूप में कार्य करो। |
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| हे भाग्यशाली महानुभावों, तुम लोगों को इन दरिद्र वृक्षों को जलाकर उन्हें भस्म नहीं करना चाहिए। तुम लोगों का कर्तव्य है कि अपने नागरिकों (प्रजा) के लिए समस्त समृद्धि की कामना करो और उनके रक्षक के रूप में कार्य करो। |
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