इस संबंध में श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर टिप्पणी करते हैं कि दक्ष को असीमित संभोग की सुविधा दी गई थी। दक्ष के पूर्वजन्म में भी उन्हें दक्ष के नाम से जाना जाता था, लेकिन यज्ञ करने के दौरान उन्होंने भगवान शिव को नाराज कर दिया, और इस प्रकार उनका सिर एक बकरे के सिर से बदल दिया गया। तब दक्ष ने अपनी गिरी हुई स्थिति के कारण अपना जीवन त्याग दिया, लेकिन क्योंकि उन्होंने असीमित यौन इच्छाओं को बनाए रखा, वह तपस्या के दौर से गुजरे जिससे उन्होंने सर्वोच्च भगवान को संतुष्ट किया, जिन्होंने तब उन्हें संभोग के लिए असीमित शक्ति दी।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यद्यपि संभोग के लिए ऐसी सुविधा सर्वोच्च भगवान की कृपा से प्राप्त होती है, लेकिन यह सुविधा उन्नत भक्तों को प्रदान नहीं की जाती है, जो भौतिक इच्छाओं (अन्यभिलाषिता-शून्यम) से मुक्त होते हैं। इस संबंध में यह ध्यान दिया जा सकता है कि यदि अमेरिकी लड़के और लड़कियाँ कृष्ण चेतना आंदोलन में लिप्त प्रभु के प्रति प्रेमपूर्ण सेवा के सर्वोच्च लाभ को प्राप्त करने के लिए कृष्ण चेतना में उन्नति करना चाहते हैं, तो उन्हें यौन जीवन के लिए इस सुविधा में लिप्त होने से बचना चाहिए। इसलिए हम सलाह देते हैं कि व्यक्ति कम से कम अवैध यौन संबंधों से बचना चाहिए। भले ही यौन जीवन के अवसर हों, व्यक्ति को स्वेच्छा से केवल संतान के लिए यौन संबंध बनाने की सीमा स्वीकार करनी चाहिए, किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं। कर्दम मुनि को भी यौन जीवन की सुविधा दी गई थी, लेकिन उनकी इच्छा बहुत कम थी। इसलिए देवहूति के गर्भ में बच्चे पैदा करने के बाद, कर्दम मुनि पूरी तरह से त्यागी हो गए। भाव यह है कि यदि कोई घर लौटना चाहता है, तो वापस भगवान के पास, उसे स्वेच्छा से यौन जीवन से बचना चाहिए। सेक्स को केवल आवश्यकतानुसार ही स्वीकार किया जाना चाहिए, असीमित रूप से नहीं।
किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि असीमित सेक्स की सुविधाएँ प्राप्त करके दक्ष को भगवान का अनुग्रह प्राप्त हुआ। बाद के छंदों से पता चलेगा कि दक्ष ने फिर से अपराध किया, इस बार नारद के चरण कमलों पर। इसलिए यद्यपि यौन जीवन भौतिक संसार में सर्वोच्च आनंद है और यद्यपि किसी व्यक्ति को ईश्वर की कृपा से यौन सुख का अवसर मिल सकता है, इसके लिए अपराध करने का जोखिम होता है। दक्ष ऐसे अपराधों के लिए खुला था, और इसलिए, सख्ती से बोलते हुए, उसे वास्तव में सर्वोच्च भगवान का पक्ष नहीं मिला। व्यक्ति को यौन जीवन में असीमित क्षमता के लिए प्रभु का पक्ष नहीं लेना चाहिए।
