विशेष-व्यक्ति-पात्रत्वाद ब्रह्माद्यास्तु विभूतयः
तदंतर्यामिणश्चैव मत्स्याद्या विभवाः स्मृताः
भगवान ब्रह्मा से नीचे, सभी जीव जो भगवान की सेवा में संलग्न होते हैं, असाधारण होते हैं और उन्हें विभूति कहा जाता है। जैसा कि भगवान नेभगवद-गीता में कहा है (10.41):
यद् यद् विभूतिमत् सत्वं श्रीमदूर्जितमेव वा
ततद् एवावगच्छ त्वं मम तेजोऽंश-सम्भवम्
"जान लो कि प्रत्येक सुंदर, गौरवशाली और शक्तिशाली रचनाएँ मेरी भव्यता की एक चिंगारी से ही उत्पन्न होती हैं।" एक जीव जो विशेष रूप से भगवान की ओर से कार्य करने के लिए सशक्त है, उसे विभूति कहा जाता है, जबकि भगवान के विष्णु-तत्व अवतार, जैसे कि मत्स्य अवतार (केशव धृता-मीना-शरीर जय जगत-ईश हरि) को विभव कहा जाता है।
