श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 4: प्रजापति दक्ष द्वारा भगवान् से की गई हंसगुह्य प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  6.4.45 
ब्रह्मा भवो भवन्तश्च मनवो विबुधेश्वरा: ।
विभूतयो मम ह्येता भूतानां भूतिहेतव: ॥ ४५ ॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मा, शिव, मनु और ऊंचे लोकों के अन्य देवता और तुम प्रजापतिगण, जो जनसंख्या वृद्धि कर रहे हो, सब जीवों के लाभार्थ काम कर रहे हो। इस प्रकार मेरी माया शक्ति के अंश स्वरूप, तुम सब मेरे विभिन्न गुणों के अवतार हो।
 
Brahma, Shiva, Manu, all the other demigods of the higher realms and all you Prajapatis who increase the population are working for the benefit of all living beings. Thus, as parts of my neutral energy, all of you are incarnations of my various qualities.
तात्पर्य
ईश्वर का सर्वोच्च व्यक्तित्व के अवतार या व्यापक के कई प्रकार होते हैं। उनके व्यक्तिगत स्व, या विष्णु-तत्व, के व्यापक को स्वांश व्यापक कहा जाता है, जबकि जीव जो विष्णु-तत्व नहीं है पर जीव-तत्व है, को विभिन्नांश, पृथक व्यापक कहते हैं। हालाँकि प्रजापति दक्ष भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव के समकक्ष नहीं है, उस उनकी तुलना उनसे इसलिए की जाती है क्योंकि वह भगवान की सेवा में संलग्न है। ईश्वर के व्यक्तित्व की सेवा में, ऐसा नहीं है कि भगवान ब्रह्मा बहुत महान माने जाते हैं जबकि कोई सामान्य मनुष्य जो भगवान की महिमा का प्रचार करने की कोशिश कर रहा है, उसे बहुत निम्न माना जाता है। इस प्रकार का कोई भेदभाव नहीं है। कोई भी हो, भौतिक रूप से उच्च या भौतिक रूप से निम्न, जो भी भगवान की सेवा में संलग्न है, वह आध्यात्मिक रूप से उनके लिए बहुत प्रिय है। इस संबंध में, श्रील माध्वाचार्य तंत्र-निर्णय का यह उद्धरण देते हैं:

विशेष-व्यक्ति-पात्रत्वाद ब्रह्माद्यास्तु विभूतयः

तदंतर्यामिणश्चैव मत्स्याद्या विभवाः स्मृताः

भगवान ब्रह्मा से नीचे, सभी जीव जो भगवान की सेवा में संलग्न होते हैं, असाधारण होते हैं और उन्हें विभूति कहा जाता है। जैसा कि भगवान नेभगवद-गीता में कहा है (10.41):

यद् यद् विभूतिमत् सत्वं श्रीमदूर्जितमेव वा

ततद् एवावगच्छ त्वं मम तेजोऽंश-सम्भवम्

"जान लो कि प्रत्येक सुंदर, गौरवशाली और शक्तिशाली रचनाएँ मेरी भव्यता की एक चिंगारी से ही उत्पन्न होती हैं।" एक जीव जो विशेष रूप से भगवान की ओर से कार्य करने के लिए सशक्त है, उसे विभूति कहा जाता है, जबकि भगवान के विष्णु-तत्व अवतार, जैसे कि मत्स्य अवतार (केशव धृता-मीना-शरीर जय जगत-ईश हरि) को विभव कहा जाता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)