श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 4: प्रजापति दक्ष द्वारा भगवान् से की गई हंसगुह्य प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.4.44 
प्रीतोऽहं ते प्रजानाथ यत्तेऽस्योद्बृंहणं तप: ।
ममैष कामो भूतानां यद्भ‍ूयासुर्विभूतय: ॥ ४४ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजापति दक्ष! तुमने संसार के लिए अच्छा काम किया है। मेरा भी मन यही चाहता है कि इस दुनिया में सभी जीव सुखी रहें। इसलिए मैं तुमसे बहुत खुश हूँ, तुम दुनिया के लिए अच्छे काम करने की कोशिश में लगे हुए हो इसलिए मैं तुमसे खुश हूँ।
 
हे प्रजापति दक्ष! तुमने संसार के लिए अच्छा काम किया है। मेरा भी मन यही चाहता है कि इस दुनिया में सभी जीव सुखी रहें। इसलिए मैं तुमसे बहुत खुश हूँ, तुम दुनिया के लिए अच्छे काम करने की कोशिश में लगे हुए हो इसलिए मैं तुमसे खुश हूँ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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