जैसे पर्वत से बहते पानी से नदियाँ भर जाती हैं, ठीक उसी तरह दक्ष की सारी इंद्रियाँ आनंद से भर गईं। अत्यधिक खुशी के कारण दक्ष कुछ भी नहीं बोल सके और बस जमीन पर ही लेटे रहे।
Just as rivers are filled with water flowing from the mountains, similarly all the senses of Daksha were filled with happiness. Due to extreme happiness, Daksha could not say anything, but remained lying on the ground.
तात्पर्य
जब कोई पूर्णतः परमेश्वर को प्राप्त करता है या उन्हें देखता है, तो वह पूर्ण आनंद से पूर्ण हो जाता है। उदाहरण के लिए, जब ध्रुव महाराज ने प्रभु को अपनी उपस्थिति में देखा, तो उन्होंने कहा, स्वामिन कृतार्थोऽस्मि वरं न याचे: "हे मेरे प्रभु, मुझे आपसे कुछ भी नहीं चाहिए। अब मैं पूर्ण रूप से संतुष्ट हूँ।" इसी तरह, जब प्रजापति दक्ष ने अपने समक्ष परमेश्वर को देखा, तो वे उनकी स्तुति में पूर्ण रूप से लीन हो गए और उन्हें कुछ भी बोलने या उनसे कुछ मांगने में असमर्थ थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥