ब्रह्म-संहिता (5.1) घोषणा करती है :
ईश्वरः परमः कृष्णः
सच्चिदानंद-विग्रहः
अनादि आदि गोविंदः
सर्व-कारण-कारणम्
"कृष्ण, जिन्हें गोविंद के नाम से जाना जाता है, सर्वोच्च नियंत्रक हैं। उनका एक अनादि, आनंदमय, आध्यात्मिक शरीर है। वे सभी के मूल कारण हैं। उनका कोई अन्य मूल नहीं है, क्योंकि वे सभी कारणों के मूल कारण हैं।" सर्वोच्च ब्रह्मा (तद् ब्रह्मा) सभी कारणों का कारण है, लेकिन उनका कोई कारण नहीं है। अनादि आदि गोविंदः सर्व-कारण-कारणम्: गोविंद, कृष्ण, सभी कारणों का मूल कारण हैं, लेकिन गोविंद के रूप में उनकी उपस्थिति का कोई कारण नहीं है। गोविंद अनेक रूपों में विस्तारित होते हैं, लेकिन फिर भी वे एक हैं। जैसा कि माधवाचार्य द्वारा पुष्टि की गई है, अनन्यः सदृशभावद् एको रूपाध्य-अभेदतः: कृष्ण का कोई कारण नहीं है और न ही कोई समान है, और वह एक हैं क्योंकि उनके विभिन्न रूप, स्वाँश और विभिन्नांश के रूप में, वे स्वयं से भिन्न नहीं हैं।
