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श्लोक 6.4.3  |
श्रीसूत उवाच
इति सम्प्रश्नमाकर्ण्य राजर्षेर्बादरायणि: ।
प्रतिनन्द्य महायोगी जगाद मुनिसत्तमा: ॥ ३ ॥ |
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| अनुवाद |
| सूत गोस्वामी बोले : हे नैमिषारण्य में एकत्र महामुनियो! जब महान योगी शुकदेव गोस्वामी ने राजा परीक्षित का प्रश्न सुना तो उन्होंने उसकी प्रशंसा की और इस प्रकार जवाब दिया। |
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| सूत गोस्वामी बोले : हे नैमिषारण्य में एकत्र महामुनियो! जब महान योगी शुकदेव गोस्वामी ने राजा परीक्षित का प्रश्न सुना तो उन्होंने उसकी प्रशंसा की और इस प्रकार जवाब दिया। |
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