श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 4: प्रजापति दक्ष द्वारा भगवान् से की गई हंसगुह्य प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.4.3 
श्रीसूत उवाच
इति सम्प्रश्नमाकर्ण्य राजर्षेर्बादरायणि: ।
प्रतिनन्द्य महायोगी जगाद मुनिसत्तमा: ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
सूत गोस्वामी बोले : हे नैमिषारण्य में एकत्र महामुनियो! जब महान योगी शुकदेव गोस्वामी ने राजा परीक्षित का प्रश्न सुना तो उन्होंने उसकी प्रशंसा की और इस प्रकार जवाब दिया।
 
सूत गोस्वामी बोले : हे नैमिषारण्य में एकत्र महामुनियो! जब महान योगी शुकदेव गोस्वामी ने राजा परीक्षित का प्रश्न सुना तो उन्होंने उसकी प्रशंसा की और इस प्रकार जवाब दिया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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