पंथास्तु कोटि-शत-वत्सर-सम्प्रगम्यो
वायोरथापि मनसो मुनि-पुंगवानाम्
सोऽप्यस्ति यत्-प्रपद-सीम्न्यविचित्य-तत्त्वे
गोविन्दमादि पुरुषं तमहम भजामी
स्थितिवाल आत्माएँ परमेश्वर को कई अरब सालों तक अपनी मानसिक अटकलबाज़ियों के माध्यम से समझने की कोशिश कर सकते हैं, या मन या वायु के वेग से यात्रा कर सकते हैं, लेकिन पूर्ण सत्य अभी भी उनके लिए समझ से बाहर रहेगा क्योंकि एक भौतिक व्यक्ति परमेश्वर के असीमित अस्तित्व की लंबाई और चौड़ाई को नहीं माप सकता है। यदि पूर्ण सत्य माप से परे है, तो कोई पूछ सकता है, कोई उन्हें कैसे प्राप्त कर सकता है? उत्तर यहाँ शब्द स्वयम्भुवे द्वारा दिया गया है: कोई उन्हें समझ सकता है या नहीं, लेकिन फिर भी वह अपनी आध्यात्मिक क्षमता में मौजूद हैं।
