श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 4: प्रजापति दक्ष द्वारा भगवान् से की गई हंसगुह्य प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.4.23 
श्रीप्रजापतिरुवाच
नम: परायावितथानुभूतये
गुणत्रयाभासनिमित्तबन्धवे ।
अद‍ृष्टधाम्ने गुणतत्त्वबुद्धिभि-
र्निवृत्तमानाय दधे स्वयम्भुवे ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
प्रजापति दक्ष ने कहा : परमेश्वर माया और उससे निर्मित भौतिक श्रेणियों से परे हैं। उनके पास अचूक ज्ञान और परम इच्छाशक्ति है, और वे जीवों और माया के नियंत्रक हैं। जो आत्माएँ इस भौतिक संसार को ही सब कुछ मानती हैं, वे उन्हें नहीं देख सकते, क्योंकि वे प्रायोगिक ज्ञान के प्रमाण से परे हैं। वे स्व-प्रकट और स्वतः पूर्ण हैं। वे किसी श्रेष्ठ कारण से उत्पन्न नहीं हुए हैं। मैं उन्हें सादर प्रणाम करता हूँ।
 
Prajāpati Dakṣa said: The Lord is beyond Maya and the bodily categories produced by Him. He has infallible knowledge and supreme will, and He is the controller of the living entities and Maya. The conditioned souls who consider this material world as the all-pervading Self cannot see Him, for He is beyond the proof of practical knowledge. He is self-manifested and self-satisfied. He is not produced by any cause. I offer my respectful obeisances unto Him.
तात्पर्य
परमतत्व परमेश्वर की पराभौतिक स्थिति यहाँ समझाई गई है। वह स्थितिवाल आत्माओं के द्वारा समझा नहीं जा सकता है, जो भौतिक दृष्टि के आदी हैं और यह नहीं समझ सकते की परमेश्वर इस लोक में निवास करते है जो उनकी दृष्टि से परे है। यदि कोई भौतिकवादी व्यक्ति ब्रह्माण्ड के सभी परमाणुओं को गिन ले, तो भी वह परमेश्वर को नहीं समझ पाएगा। जैसा की ब्रम्ह संहिता (5.34) में कहा गया है:

पंथास्तु कोटि-शत-वत्सर-सम्प्रगम्यो

वायोरथापि मनसो मुनि-पुंगवानाम्

सोऽप्यस्ति यत्-प्रपद-सीम्न्यविचित्य-तत्त्वे

गोविन्दमादि पुरुषं तमहम भजामी

स्थितिवाल आत्माएँ परमेश्वर को कई अरब सालों तक अपनी मानसिक अटकलबाज़ियों के माध्यम से समझने की कोशिश कर सकते हैं, या मन या वायु के वेग से यात्रा कर सकते हैं, लेकिन पूर्ण सत्य अभी भी उनके लिए समझ से बाहर रहेगा क्योंकि एक भौतिक व्यक्ति परमेश्वर के असीमित अस्तित्व की लंबाई और चौड़ाई को नहीं माप सकता है। यदि पूर्ण सत्य माप से परे है, तो कोई पूछ सकता है, कोई उन्हें कैसे प्राप्त कर सकता है? उत्तर यहाँ शब्द स्वयम्भुवे द्वारा दिया गया है: कोई उन्हें समझ सकता है या नहीं, लेकिन फिर भी वह अपनी आध्यात्मिक क्षमता में मौजूद हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)