Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.4.21: उस पर्वत के पास अघमर्षण नामक एक पवित्र स्थल था। वहाँ प्रजापति दक्ष ने सभी अनुष्ठानों को पूरा किया और भगवान हरि को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या में लीन होकर उन्हें संतुष्ट किया। | bhagavat अध्याय 6.4: प्रजापति दक्ष द्वारा भगवान् से की गई हंसगुह्य प्रार्थनाएँ । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्राघमर्षणं नाम तीर्थं पापहरं परम् ।
उपस्पृश्यानुसवनं तपसातोषयद्धरिम् ॥ २१ ॥
अनुवाद
उस पर्वत के पास अघमर्षण नामक एक पवित्र स्थल था। वहाँ प्रजापति दक्ष ने सभी अनुष्ठानों को पूरा किया और भगवान हरि को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या में लीन होकर उन्हें संतुष्ट किया।
Near that mountain there was a pilgrimage center called Aghamarshan. There Prajapati Daksh performed all the rituals and satisfied Lord Hari by engaging in great penance to please him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥