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श्लोक 6.4.20  |
तमबृंहितमालोक्य प्रजासर्गं प्रजापति: ।
विन्ध्यपादानुपव्रज्य सोऽचरद्दुष्करं तप: ॥ २० ॥ |
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| अनुवाद |
| पर जब प्रजापति दक्ष ने देखा कि वो हर तरह के जीवों को ठीक से उत्पन्न नहीं कर पा रहे हैं, तब वो विंध्याचल के पास एक पर्वत पर गये और वहाँ उन्होंने बहुत कठोर तपस्या की। |
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| पर जब प्रजापति दक्ष ने देखा कि वो हर तरह के जीवों को ठीक से उत्पन्न नहीं कर पा रहे हैं, तब वो विंध्याचल के पास एक पर्वत पर गये और वहाँ उन्होंने बहुत कठोर तपस्या की। |
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