चाक्षुसे त्वन्तरे प्राप्ते
प्राक्-सर्गे काल-विद्रुते
यः ससर्ज प्रजा इष्टाः
स दक्षो दैव-कोदितः
"उनका पिछला शरीर नष्ट हो चुका था, परन्तु वे स्वयं, जो वही दक्ष थे, सर्वोच्च इच्छा से प्रेरित होकर, चाक्षुष मन्वन्तर में सभी वांछित जीवों की रचना की।" (भाग. 4.30.49) इस प्रकार दक्ष ने अपना पिछला वैभव पुनः प्राप्त किया और तीनों लोकों को भरने के लिए हजारों और लाखों संतानों को पुनः जन्म दिया।
