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bhagavat 6.4.16: शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा: हे राजन्! प्रचेताओं को प्रसन्न करने के बाद चन्द्रमा-राजा सोम ने प्रम्लोचा अप्सरा से उत्पन्न सुन्दर कन्या उन्हें प्रदान की। प्रचेताओं ने प्रम्लोचा की कन्या के उन्नत सौन्दर्य वाले अत्यन्त सुन्दर नितम्बों का अभिवादन किया और धार्मिक पद्धति से विवाह कर लिया।   |   bhagavat अध्याय 6.4: प्रजापति दक्ष द्वारा भगवान् से की गई हंसगुह्य प्रार्थनाएँ   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 4: प्रजापति दक्ष द्वारा भगवान् से की गई हंसगुह्य प्रार्थनाएँ  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.4.16 
इत्यामन्‍त्र्‍य वरारोहां कन्यामाप्सरसीं नृप ।
सोमो राजा ययौ दत्त्वा ते धर्मेणोपयेमिरे ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने आगे कहा: हे राजन्! प्रचेताओं को प्रसन्न करने के बाद चन्द्रमा-राजा सोम ने प्रम्लोचा अप्सरा से उत्पन्न सुन्दर कन्या उन्हें प्रदान की। प्रचेताओं ने प्रम्लोचा की कन्या के उन्नत सौन्दर्य वाले अत्यन्त सुन्दर नितम्बों का अभिवादन किया और धार्मिक पद्धति से विवाह कर लिया।
 
Sukadeva Goswami continued: O King! After satisfying the Prachetas, Soma, the king of the moon, gave them a beautiful daughter born of Pramlocha Apsara. The Prachetas welcomed the daughter of Pramlocha. Her raised buttocks were extremely beautiful. They married her according to the religious custom.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)