Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.4.15: अब इन बेचारे पेड़ों को जलाने की ज़रूरत नहीं है। जो पेड़ बचे हैं, उन्हें खुशी-खुशी रहने दो। बेशक, तुम्हें भी खुश रहना चाहिए। यहाँ एक सुंदर, योग्य लड़की है जिसका नाम मारिषा है, जिसका पालन-पोषण पेड़ों ने अपनी बेटी की तरह किया है। तुम इस सुंदर लड़की को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर सकते हो। | bhagavat अध्याय 6.4: प्रजापति दक्ष द्वारा भगवान् से की गई हंसगुह्य प्रार्थनाएँ । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अलं दग्धैर्द्रुमैर्दीनै: खिलानां शिवमस्तु व: ।
वार्क्षी ह्येषा वरा कन्या पत्नीत्वे प्रतिगृह्यताम् ॥ १५ ॥
अनुवाद
अब इन बेचारे पेड़ों को जलाने की ज़रूरत नहीं है। जो पेड़ बचे हैं, उन्हें खुशी-खुशी रहने दो। बेशक, तुम्हें भी खुश रहना चाहिए। यहाँ एक सुंदर, योग्य लड़की है जिसका नाम मारिषा है, जिसका पालन-पोषण पेड़ों ने अपनी बेटी की तरह किया है। तुम इस सुंदर लड़की को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर सकते हो।
Now there is no need to burn these poor trees. Let the trees that are left live happily. Of course, you people should also live happily. There is a very beautiful girl here, named Marisha, who has been brought up by these trees as their own daughter. You people can accept this beautiful girl as your wife.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥