श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 3: यमराज द्वारा अपने दूतों को आदेश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  6.3.8 
तस्य ते विहितो दण्डो न लोके वर्ततेऽधुना ।
चतुर्भिरद्भ‍ुतै: सिद्धैराज्ञा ते विप्रलम्भिता ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
किन्तु अब हम देख रहे हैं कि आपके अधिकार में नियत किया हुआ दण्ड प्रभावशाली नहीं रहा, क्योंकि आपके आदेश का उल्लंघन चार अद्भुत और सिद्ध पुरुषों द्वारा किया जा चुका है।
 
But now we see that the punishment prescribed under your authority is not effective, because your order has been violated by four wonderfully accomplished men.
तात्पर्य
यमदूतों को यह लगता था कि न्याय करने की यमराज ही एकमात्र जिम्मेदार हैं। उन्हें पूरा भरोसा था कि उनके फैसलों का कोई विरोध नहीं कर सकता, लेकिन आश्चर्य इस बात का था कि सिद्धलोक के चार विलक्षण पुरुषों द्वारा उनके आदेश का उल्लंघन किया गया था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)