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bhagavat 6.3.7: परम निर्णायक केवल एक ही हो सकता है, कई नहीं। हम यह मानते थे कि आप वह परम निर्णायक हैं और देवताओं पर भी आपका अधिकार है। हमारी मान्यता यह थी कि आप सभी प्राणियों के स्वामी हैं, जो सभी मनुष्यों के अच्छे और बुरे कर्मों में भेदभाव करते हैं।   |   bhagavat अध्याय 6.3: यमराज द्वारा अपने दूतों को आदेश   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 3: यमराज द्वारा अपने दूतों को आदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  6.3.7 
अतस्त्वमेको भूतानां सेश्वराणामधीश्वर: ।
शास्ता दण्डधरो नृणां शुभाशुभविवेचन: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
परम निर्णायक केवल एक ही हो सकता है, कई नहीं। हम यह मानते थे कि आप वह परम निर्णायक हैं और देवताओं पर भी आपका अधिकार है। हमारी मान्यता यह थी कि आप सभी प्राणियों के स्वामी हैं, जो सभी मनुष्यों के अच्छे और बुरे कर्मों में भेदभाव करते हैं।
 
There should be only one supreme judge, not many. We used to think that you are the supreme judge and you have authority over the gods as well. We believed that you are the master of all living beings, who discriminates between the good and bad deeds of all human beings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)