यदि स्युर्बहवो लोके शास्तारो दण्डधारिण: ।
कस्य स्यातां न वा कस्य मृत्युश्चामृतमेव वा ॥ ५ ॥
अनुवाद
यदि इस ब्रह्माण्ड में अनेक शासक और न्यायकर्ता हैं, जो सज़ा और इनाम के विषय में अलग-अलग मत रखते हैं, तो उनके विपरीत कार्य एक-दूसरे को कमज़ोर कर देंगे और न ही कोई सज़ा पाएगा और न ही पुरस्कृत होगा। नहीं तो, अगर उनके एक-दूसरे से विपरीत काम एक-दूसरे को निष्क्रिय नहीं कर पाते तो हर एक को सज़ा और पुरस्कार दोनों ही देना होगा।
If there are many rulers and judges in this universe who differ in the matter of punishment and reward, then their opposing actions will neutralise each other and neither one will be punished nor rewarded. Otherwise, if their opposing actions cannot neutralise each other, then each one will have to give both punishment and reward.
तात्पर्य
क्योंकि यमदूत यमराज के आदेश को पूरा करने में असफल रहे थे, उन्हें संदेह था कि क्या यमराज वास्तव में पापियों को दंडित करने की शक्ति रखते थे। हालाँकि यमराज के आदेश का पालन करते हुए वे अजामिल को गिरफ्तार करने गए थे, उन्होंने पाया कि वे किसी उच्चतर प्राधिकारी के आदेश के कारण असफल रहे। इसलिए वे इस बात से अनिश्चित थे कि कई प्राधिकारी थे या केवल एक। अगर कई प्राधिकारी होते जो अलग-अलग निर्णय देते, जो विरोधाभासी हो सकते हैं, तो एक व्यक्ति को गलत तरीके से दंडित किया जा सकता है या गलत तरीके से पुरस्कृत किया जा सकता है, या उसे न दंडित किया जा सकता है और न ही पुरस्कृत किया जा सकता है। भौतिक दुनिया में हमारे अनुभव के अनुसार, एक अदालत में दंडित व्यक्ति दूसरी अदालत में अपील कर सकता है। इस प्रकार एक ही व्यक्ति को या तो दंडित किया जा सकता है या विभिन्न निर्णयों के अनुसार पुरस्कृत किया जा सकता है। हालाँकि, प्रकृति के नियम या भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व के न्यायालय में ऐसे विरोधाभासी निर्णय नहीं हो सकते। न्यायाधीश और उनके निर्णय पूर्ण और विरोधाभासों से मुक्त होने चाहिए। वास्तव में, अजामिल के मामले में यमराज की स्थिति बहुत अजीब थी क्योंकि यमदूत अजामिल को गिरफ्तार करने के प्रयास में सही थे, लेकिन विष्णुदूतों ने उन्हें चकमा दिया था। यद्यपि इन परिस्थितियों में, यमराज पर विष्णुदूतों और यमदूतों दोनों ने आरोप लगाया था, वह न्याय करने में पूर्ण हैं क्योंकि उन्हें भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व ने अधिकार दिया है। इसलिए वह समझाएंगे कि उनकी वास्तविक स्थिति क्या है और कैसे हर कोई सर्वोच्च नियंत्रक, भगवान के व्यक्तित्व द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥