देहापत्य-कलत्रादिष्व
आत्म-सैन्येष्वसत्स्वपि
तेषां प्रमत्तो निधनं
पश्यन्नापि न पश्यति
ऐसे व्यक्ति आत्मसंतुष्टि से मानते हैं कि उनके राष्ट्र, समुदाय या परिवार उनकी रक्षा कर सकते हैं, इस बात से अनजान कि समय के साथ ऐसे सभी अचूक सैनिक नष्ट हो जाएँगे। अंत में, व्यक्ति को चाहिए कि वह उन व्यक्तियों के साथ जुड़ने का प्रयास करें जो चौबीसों घंटे भक्ति सेवा में लगे रहते हैं।
