हरेर नाम हरेर नाम
हरेर नामैव केवलम
कलौ नास्त्येव नास्त्येव
नास्त्येव गतिरन्यथा
कलि के इस युग में कोई भी मुक्त होने की सभी अनुष्ठानिक क्रियाएं नहीं कर सकता; यह अत्यंत कठिन है। इसलिए सभी शास्त्रों और सभी आचार्यों ने सिफारिश की है कि इस युग में व्यक्ति पवित्र नाम जपे।
