मामुपेत्य पुनर्जन्म
दुःखालयं अशाश्वतम
ना्पुनवंति महात्मानः
सं सिद्धिं परमां गता:
"मुझे प्राप्त करने के बाद, महान आत्माएँ, जो भक्ति में योगी हैं, इस अस्थायी दुनिया में कभी नहीं लौटते हैं, जो दुखों से भरी हुई है, क्योंकि उन्होंने सबसे उच्च पूर्णता प्राप्त कर ली है।"
