श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 3: यमराज द्वारा अपने दूतों को आदेश  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.3.12 
यम उवाच
परो मदन्यो जगतस्तस्थुषश्च
ओतं प्रोतं पटवद्यत्र विश्वम् ।
यदंशतोऽस्य स्थितिजन्मनाशा
नस्योतवद्यस्य वशे च लोक: ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
यमराज ने कहा: मेरे प्यारे नौकरो! तुम लोगों ने मुझे सर्वोच्च माना है, पर मैं वास्तव में ऐसा नहीं हूँ। मेरे ऊपर और इन्द्र और चन्द्र सहित बाकी सब देवताओं से ऊपर एक सर्वोच्च स्वामी और नियंत्रक हैं। उनकी आंशिक अभिव्यक्तियाँ ब्रह्मा, विष्णु और शिव हैं, जो इस ब्रह्मांड को बनाने, उसे बनाए रखने और उसका संहार करने के काम को संभालते हैं। वे उन दो धागों के समान हैं जो बुने हुए कपड़े की लंबाई और चौड़ाई बनाते हैं। पूरा संसार उनके द्वारा उसी तरह नियंत्रित होता है जैसे एक बैल अपनी नाक की रस्सी द्वारा नियंत्रित होता है।
 
Yamaraja said: My dear servants! You have accepted me as the supreme, but I am not really. There is a supreme lord and controller above me and all the other gods including Indra and Chandra. His partial forms are Brahma, Vishnu and Shiva who bear the burden of creation and destruction of the universe. They are like the two threads which form the length and breadth or warp and weft of a woven cloth. The entire universe is controlled by them in the same way as a bull is controlled by the rope around its nose.
तात्पर्य
यमराज के आदेश वाहकों को शक था कि यमराज से भी ऊपर कोई शासक था। उनके संदेह को दूर करने के लिए, यमराज ने तुरंत जवाब दिया, "हाँ, हर चीज़ के ऊपर एक सर्वोच्च नियंत्रक है।" यमराज कुछ चलती-फिरती जीवित संस्थाओं, जैसे कि मनुष्य, के प्रभारी हैं, लेकिन जानवर, जो चलते-फिरते भी हैं, उनके नियंत्रण में नहीं हैं। केवल मनुष्यों को ही सही और गलत की चेतना है, और उनमें से केवल पापपूर्ण गतिविधियाँ करने वाले ही यमराज के नियंत्रण में आते हैं। इसलिए यद्यपि यमराज एक नियंत्रक हैं, वह केवल कुछ जीवित संस्थाओं का एक विभागीय नियंत्रक है। अन्य देवता हैं जो कई अन्य विभागों को नियंत्रित करते हैं, लेकिन उन सभी के ऊपर एक सर्वोच्च नियंत्रक, कृष्ण है। ईश्वरः परमः कृष्णः सच्चिदानंद-विग्रहः: सर्वोच्च नियंत्रक कृष्ण है। अन्य, जो ब्रह्मांड के मामलों में अपने स्वयं के विभागों को नियंत्रित करते हैं, सर्वोच्च नियंत्रक कृष्ण की तुलना में महत्वहीन हैं। कृष्ण भगवद-गीता (7.7) में कहते हैं, मत्तः परतरं नान्यत् किञ्चिदस्ति धनञ्जय: "हे धनंजय [अर्जुन], कोई भी मुझसे श्रेष्ठ नहीं है।" इसलिए यमराज ने यह पुष्टि करके कि सभी के ऊपर एक सर्वोच्च नियंत्रक है, अपने सहायकों, यमदूतों के संदेह को तुरंत दूर कर दिया।

श्रील माध्वाचार्य बताते हैं कि ओतं प्रोतं शब्द सभी कारणों के कारण को दर्शाते हैं। परमेश्वर ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति के लिए लंबवत और क्षैतिज दोनों हैं। इसकी पुष्टि स्कंद पुराण के निम्नलिखित श्लोक से होती है:

यथा कंठा-पटः सूत्र

ओताः प्रोताश्च स स्थिताः

एवं विष्णाव इदं विश्वं

ओतं प्रोतं च संस्थितं

जैसे एक रजाई के दो धागे, क्षैतिज और लंबवत, जिससे बनी होती है, भगवान विष्णु ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति के लंबवत और क्षैतिज कारण के रूप में स्थित हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)