श्रीराजोवाच
निशम्य देव: स्वभटोपवर्णितं
प्रत्याह किं तानपि धर्मराज: ।
एवं हताज्ञो विहतान्मुरारे-
र्नैदेशिकैर्यस्य वशे जनोऽयम् ॥ १ ॥
अनुवाद
राजा परीक्षित बोले - हे प्रभु हे शुकदेव गोस्वामी, यमराज सभी जीवों के धार्मिक और अधार्मिक कार्यों के नियंत्रक हैं, लेकिन उनका आदेश विफल हो गया। जब उनके सेवकों यानी यमदूतों ने उन्हें विष्णुदूतों के हाथों अपनी हार की सूचना दी, जिसने अजामिल को गिरफ्तार करने से रोक दिया था, तो यमराज ने क्या जवाब दिया?
King Parikshit said: O Lord, O Sukadeva Goswami! Yamaraja is the controller of the religious and non-religious actions of all living entities, but his command has been rendered futile. When his servants, the messengers of Yama, informed him of his defeat at the hands of the messengers of Vishnu who had prevented him from arresting Ajamila, what did Yamaraja reply?
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर कहते हैं कि यद्यपि यमदूतों के वक्तव्य वैदिक सिद्धांतों द्वारा पूरी तरह से समर्थित थे, किंतु विष्णुदूतों के वक्तव्य विजयी हुए। यह स्वयं यमराज ने पुष्टि की थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥