नाम्नो हि यावती शक्तिः
पाप-निर्हरणे हरेः
तावत् कर्तुं न शक्नोति
पातकं पातकी नरः
"केवल हरि के एक पवित्र नाम का जाप करने से, एक पापी व्यक्ति उसके द्वारा किए जाने वाले पापों की प्रतिक्रियाओं का प्रतिकार कर सकता है।" (बृहद-विष्णु पुराण)
अवशेनापि यन्-नामनि
कीर्तिते सर्व-पातकैः
पुमान् विमुच्यते सद्यः
सिंह-त्रस्तैर्मृगैरिव
"यदि कोई भगवान के पवित्र नाम का जप करता है, तो असहाय स्थिति में भी या ऐसा करने की इच्छा न होने पर भी, उसके पापमय जीवन की सभी प्रतिक्रियाएँ दूर हो जाती हैं, जैसे जब कोई शेर दहाड़ता है, तो सभी छोटे जानवर डर के मारे भाग जाते हैं।" (गरुड़ पुराण)
सकृदुच्चरितं येन
हरिरित्यक्षर-द्वयं
बद्ध-परिकरस तेना
मोक्षाय गमनं प्रति
"भगवान के पवित्र नाम का एक बार उच्चारण करने से, जिसमें ह-रि नामक दो अक्षर हैं, व्यक्ति अपने मुक्ति के मार्ग की गारंटी देता है।" (स्कंद पुराण)
ये कुछ कारण हैं कि विष्णु दूतों ने यमदूतों द्वारा अजामिल को यमराज के दरबार में ले जाने पर आपत्ति क्यों जताई।
