जन्म कर्म च मे दिव्यम्
एवं यो वेत्ति तत्वतः
त्यक्त्वा देहं पुनर् जन्म
नैति माम एति सोऽर्जुन
“जो मेरे प्रकट होने और मेरे कर्मो के पारलौकिक स्वरुप को जानता है, वह शरीर छोड़ने के बाद इस भौतिक संसार में पुनः जन्म नहीं लेता, बल्कि मेरे अमर निवास को प्राप्त करता है, हे अर्जुन |”
कृष्ण चेतना में पूर्णता प्राप्त करने का परिणाम यह होता है कि अपनी भौतिक देह को त्यागने के बाद, वह तुरंत एक ही बार में आध्यात्मिक शरीर में आध्यात्मिक संसार में स्थानांतरित कर दिया जाता है और भगवान का सहयोगी बन जाता है। कुछ भक्त वैकुण्ठ लोक में जाते हैं, और अन्य गोलोक वृन्दावन में जाते हैं। इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण का सहयोगी बन जाते हैं।
