श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 2: विष्णुदूतों द्वारा अजामिल का उद्धार  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  6.2.43 
हित्वा कलेवरं तीर्थे गङ्गायां दर्शनादनु ।
सद्य: स्वरूपं जगृहे भगवत्पार्श्ववर्तिनाम् ॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
विष्णुदूतों का आगमन देखकर अजामिल ने गंगा तट पर हरिद्वार में अपना भौतिक शरीर त्याग दिया। उसने अपना मूल आध्यात्मिक शरीर वापस प्राप्त कर लिया, जो भगवान के सहयोगी के लिए उपयुक्त शरीर था।
 
After seeing the messengers of Vishnu, Ajamila gave up his physical body at Hardwar on the banks of the river Ganga. He regained his original spiritual body, which was suitable for an attendant of the Lord.
तात्पर्य
भगवान् ने भगवद् गीता (4.9) में कहा है:

जन्म कर्म च मे दिव्यम्

एवं यो वेत्ति तत्वतः

त्यक्त्वा देहं पुनर् जन्म

नैति माम एति सोऽर्जुन

“जो मेरे प्रकट होने और मेरे कर्मो के पारलौकिक स्वरुप को जानता है, वह शरीर छोड़ने के बाद इस भौतिक संसार में पुनः जन्म नहीं लेता, बल्कि मेरे अमर निवास को प्राप्त करता है, हे अर्जुन |”

कृष्ण चेतना में पूर्णता प्राप्त करने का परिणाम यह होता है कि अपनी भौतिक देह को त्यागने के बाद, वह तुरंत एक ही बार में आध्यात्मिक शरीर में आध्यात्मिक संसार में स्थानांतरित कर दिया जाता है और भगवान का सहयोगी बन जाता है। कुछ भक्त वैकुण्ठ लोक में जाते हैं, और अन्य गोलोक वृन्दावन में जाते हैं। इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण का सहयोगी बन जाते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)