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bhagavat 6.2.30: क्या यह एक सपना था या सच्चाई? मैंने भयावह पुरुषों को रस्सी के साथ गिरफ्तार करने और मुझे दूर ले जाने के लिए आते हुए देखा। वे कहाँ चले गए?   |   bhagavat अध्याय 6.2: विष्णुदूतों द्वारा अजामिल का उद्धार   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  6.2.30 
किमिदं स्वप्न आहो स्वित् साक्षाद् द‍ृष्टमिहाद्भ‍ुतम् ।
क्‍व याता अद्य ते ये मां व्यकर्षन् पाशपाणय: ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
क्या यह एक सपना था या सच्चाई? मैंने भयावह पुरुषों को रस्सी के साथ गिरफ्तार करने और मुझे दूर ले जाने के लिए आते हुए देखा। वे कहाँ चले गए?
 
Was it a dream or was it reality? I saw horrifying men with ropes in their hands coming to arrest me and drag me away. Where have they gone?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)