श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 2: विष्णुदूतों द्वारा अजामिल का उद्धार  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.2.21 
इति प्रत्युदिता याम्या दूता यात्वा यमान्तिकम् ।
यमराज्ञे यथा सर्वमाचचक्षुररिन्दम ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन परीक्षित, हे शत्रुओं को जीतने वाले! जब यमराज के सेवकों ने विष्णु दूतों से उत्तर प्राप्त कर लिया, तो वे यमराज के पास गए और जो कुछ घटा था, सब कुछ उन्हें सुनाया।
 
O King Parikshit! O destroyer of all enemies! When the servants of Yamaraja received the answer from the messengers of Vishnu, they went to Yamaraja and told him everything that had happened.
तात्पर्य
इस श्लोक में प्रत्यूदिताः शब्द अति महत्वपूर्ण है। यमराज के सेवक इतने शक्तिशाली होते हैं कि उन्हें कहीं भी कोई रोक नहीं पाता, लेकिन इस बार वे भ्रमित और निराश होकर लौटे। वे ऐसे व्यक्ति को ले जाने में असफल रहे जिसे वे पापी मानते थे। इसलिए वे तुरंत यमराज के पास लौटे और उन्होंने जो कुछ भी हुआ था उसका वर्णन किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)