यथागदं वीर्यतममुपयुक्तं यदृच्छया ।
अजानतोऽप्यात्मगुणं कुर्यान्मन्त्रोऽप्युदाहृत: ॥ १९ ॥
अनुवाद
यदि कोई व्यक्ति किसी दवा की प्रभाव क्षमता से अनजान होकर उस दवा को खाता है या उसे खिलाया जाता है, तो वह दवा उस व्यक्ति के ज्ञान के बिना ही अपना काम करेगी, क्योंकि उसकी शक्ति रोगी की समझ पर निर्भर नहीं करती है। इसी तरह, भगवान के पवित्र नाम का जप करने के महत्व को न जानते हुए भी यदि कोई व्यक्ति जाने या अनजाने में उसका जप करता है, तो वह जप बहुत प्रभावशाली होगा।
If a person unaware of the effectiveness of a medicine takes that medicine or is forcibly fed to him, then that medicine will work without that person knowing, because its power does not depend on the knowledge of the patient. Similarly, if a person knowingly or unknowingly does the chanting of the Lord's name, even though he does not know the importance of it, then that chanting will be extremely effective.
तात्पर्य
पश्चिमी देशों में, जहाँ हरे कृष्णा आंदोलन का प्रसार हो रहा है, वहाँ के विद्वान विद्वान और अन्य विचारशील लोग इसकी प्रभावशीलता का एहसास कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, एक विद्वान विद्वान डॉ. जे. स्टिलसन जुडाह इस आंदोलन की ओर बहुत अधिक आकर्षित हुए हैं क्योंकि उन्होंने वास्तव में देखा है कि यह नशीली दवाओं के आदी लोगों को शुद्ध वैष्णवों में बदल रहा है जो स्वेच्छा से कृष्ण और मानवता के सेवक बन जाते हैं। कुछ साल पहले भी ऐसे हिप्पी हरे कृष्ण मंत्र को नहीं जानते थे, लेकिन अब वे इसका जाप कर रहे हैं और शुद्ध वैष्णव बन रहे हैं। इस प्रकार वे सभी पापी गतिविधियों से मुक्त हो रहे हैं, जैसे कि अवैध यौन संबंध, नशा, मांस खाना और जुआ खेलना। यह हरे कृष्णा आंदोलन की प्रभावशीलता का व्यावहारिक प्रमाण है, जिसका समर्थन इस श्लोक में किया गया है। हरे कृष्ण मंत्र के जप के मूल्य को कोई जान सकता है या नहीं, लेकिन अगर कोई किसी तरह से इसका जाप करता है, तो वह तुरंत शुद्ध हो जाएगा, जैसे कि जो व्यक्ति एक शक्तिशाली दवा लेता है वह उसके प्रभावों को महसूस करेगा, चाहे वह जानबूझकर लेता है या अनजाने में।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥