यैँ यैँ वा अँपि स्मरन् भावम्
त्याजत्य अन्ते कलेवरम्
तं तम् एवेति कौन्तेय
सदा तद्भाव भावितः
"कोई भी व्यक्ति मृत्यु के समय जैसी मनोदशा रखता है, वह निश्चित रूप से वैसी ही अवस्था को प्राप्त होता है।" यदि कोई हरे कृष्ण महामंत्र का जप करता है, तो यह स्वाभाविक है कि दुर्घटना के समय वह हरे कृष्ण का जप करेगा। हालाँकि, इस तरह के अभ्यास के बिना भी, यदि किसी तरह कोई दुर्घटना के समय श्रीकृष्ण का पवित्र नाम (हरे कृष्ण) जप करता है और मर जाता है, तो उसे मृत्यु के बाद नरक से मुक्ति मिल जाएगी।
