Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.2.14: जो व्यक्ति ईश्वर के पवित्र नाम का जाप करता है, उसे अनगिनत पापों के परिणामों से तुरंत मुक्त कर दिया जाता है। भले ही उसने यह जाप अप्रत्यक्ष रूप से (कुछ और संकेत देने के लिए), चुटकुले में, संगीतमय मनोरंजन के लिए या लापरवाही से ही क्यों न किया हो। शास्त्रों में पारंगत सभी विद्वान पंडित इस बात को स्वीकारते हैं। | bhagavat अध्याय 6.2: विष्णुदूतों द्वारा अजामिल का उद्धार । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
साङ्केत्यं पारिहास्यं वा स्तोभं हेलनमेव वा ।
वैकुण्ठनामग्रहणमशेषाघहरं विदु: ॥ १४ ॥
अनुवाद
जो व्यक्ति ईश्वर के पवित्र नाम का जाप करता है, उसे अनगिनत पापों के परिणामों से तुरंत मुक्त कर दिया जाता है। भले ही उसने यह जाप अप्रत्यक्ष रूप से (कुछ और संकेत देने के लिए), चुटकुले में, संगीतमय मनोरंजन के लिए या लापरवाही से ही क्यों न किया हो। शास्त्रों में पारंगत सभी विद्वान पंडित इस बात को स्वीकारते हैं।
A person who chants the name of the Lord is instantly freed from the consequences of innumerable sins. Even if he does this chanting indirectly (to indicate something else), in jest, for musical entertainment or in a negligent manner. This is accepted by all learned scholars well versed in the scriptures.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥