न निष्कृतैरुदितैर्ब्रह्मवादिभि-
स्तथा विशुद्ध्यत्यघवान् व्रतादिभि: ।
यथा हरेर्नामपदैरुदाहृतै-
स्तदुत्तमश्लोकगुणोपलम्भकम् ॥ ११ ॥
अनुवाद
वैदिक कर्मकाण्डों का पालन करना या प्रायश्चित्त करना, भगवान् हरि के पवित्र नाम का कीर्तन करने के समान शुद्धि नहीं देता। अनुष्ठानिक प्रायश्चित्त पापों से मुक्ति दिला सकता है, लेकिन यह भक्ति को जागृत नहीं करता, जैसा कि परम भगवान के नाम का कीर्तन करता है। कीर्तन भगवान् के यश, गुण, लक्षण, लीलाओं और साज-सामग्री का स्मरण कराता है।
Observance of Vedic rituals or penance does not purify sinners the way chanting the holy name of Lord Hari purifies them. Though ritualistic penance may free one from the consequences of sin, it does not awaken devotion the way chanting the name of the Supreme Lord reminds one of the glory, qualities, attributes, pastimes and paraphernalia of the Lord.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर टिप्पणी करते हैं कि प्रभु के पावन नाम का जाप का विशेष महत्व है जो इसे गंभीर, अधिक गंभीर और सर्वाधिक गंभीर पापपूर्ण कार्यों के प्रायश्चित के लिए वैदिक कर्मकांड समारोहों से अलग करता है। मनु-संहिता और पराशर-संहिता से शुरू होकर धर्म-शास्त्र नामक बीस प्रकार के धार्मिक ग्रंथ हैं, लेकिन यहाँ इस बात पर जोर दिया गया है कि यद्यपि इन ग्रंथों के धार्मिक सिद्धांतों का पालन करके व्यक्ति सबसे पापपूर्ण गतिविधियों की प्रतिक्रियाओं से मुक्त हो सकता है, लेकिन यह एक पापी व्यक्ति को प्रभु की प्रेममयी सेवा के स्तर तक नहीं पहुँचा सकता। दूसरी ओर, प्रभु के पवित्र नाम का केवल एक बार जाप करने से न केवल व्यक्ति को सबसे बड़े पापों की प्रतिक्रियाओं से तुरंत मुक्त करता है, बल्कि उसे भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व के प्रति प्रेममयी सेवा प्रदान करने के मंच तक भी पहुँचाता है, जो उत्तमश्लोक के रूप में वर्णित है क्योंकि वह अपनी शानदार गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध है। इस प्रकार अपने रूप, अपने गुणों और अपनी लीलाओं को याद करके व्यक्ति उनकी सेवा करता है। श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर बताते हैं कि प्रभु की सर्वशक्तिमानता के कारण प्रभु के पवित्र नाम का जाप मात्र से यह सब संभव है। वैदिक कर्मकांडों के प्रदर्शन से जो नहीं प्राप्त किया जा सकता वह प्रभु के पवित्र नाम के जाप के माध्यम से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। पवित्र नाम का जाप करने और परमानंद में नृत्य करने में बहुत सरल और उदात्त है कि कोई भी केवल इस प्रक्रिया का पालन करके आध्यात्मिक जीवन के सभी लाभ प्राप्त कर सकता है। इसलिए श्री चैतन्य महाप्रभु घोषणा करते हैं, परम विजयते श्री-कृष्ण-संकीर्तनम: "सभी महिमा श्री कृष्ण संकीर्तन की!" हमने जो संकीर्तन आंदोलन शुरू किया है वह सभी पापपूर्ण प्रतिक्रियाओं से शुद्ध होने और तुरंत आध्यात्मिक जीवन के मंच पर आने की सर्वोत्तम प्रक्रिया प्रदान करता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥