श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 19: पुंसवन व्रत का अनुष्ठान  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.19.18 
कृतमेकतरेणापि दम्पत्योरुभयोरपि ।
पत्‍न्‍यां कुर्यादनर्हायां पतिरेतत् समाहित: ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
पति-पत्नी में से कोई एक भक्तिपूर्वक यह व्रत कर सकता है और दोनों को इसका फल मिलेगा। यदि पत्नी इस व्रत को करने में असमर्थ हो तो पति सावधानीपूर्वक व्रत का पालन करे जिससे उसकी धर्मनिष्ठ पत्नी को भी उसका फल मिलेगा।
 
Either of the husband or wife can perform this devotion. Both get the benefits due to their sweet relationship. Therefore, if the wife is unable to do this fast, then the husband should do it carefully. This will ensure that his obedient wife also gets the benefits.
तात्पर्य
पति और पत्नी के बीच का संबंध वहुत मजबूती से बनता है जब पत्नी वफादार हो और पति निष्ठावान हो। फिर भले ही पत्नी कमज़ोर होने के कारण अपने पति के साथ भगवत सेवा न कर सके, यदि वह पवित्र और ईमानदार है तो वह अपने पति के कार्यों के आधे हिस्से की साझीदार होती है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)