Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 6.19.16: इसके बाद, अत्यधिक भक्ति और विनम्रता के भाव से व्यक्ति को भगवान और माँ लक्ष्मी की स्तुति करनी चाहिए। फिर यज्ञावशेष की सुगंध लेनी चाहिए और फिर से भगवान और लक्ष्मी जी की पूजा करनी चाहिए।   |   bhagavat अध्याय 6.19: पुंसवन व्रत का अनुष्ठान   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 19: पुंसवन व्रत का अनुष्ठान  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  6.19.16 
तत: स्तुवीत स्तोत्रेण भक्तिप्रह्वेण चेतसा ।
यज्ञोच्छिष्टमवघ्राय पुनरभ्यर्चयेद्धरिम् ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद, अत्यधिक भक्ति और विनम्रता के भाव से व्यक्ति को भगवान और माँ लक्ष्मी की स्तुति करनी चाहिए। फिर यज्ञावशेष की सुगंध लेनी चाहिए और फिर से भगवान और लक्ष्मी जी की पूजा करनी चाहिए।
 
After that, man should praise God and Goddess Lakshmi with utmost devotion and humility. Then smell the remains of the Yagya and worship Vishnu and Lakshmi again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)