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bhagavat 6.18.69: तत्पश्चात दिति ने इंद्र से कहा- हे पुत्र! मैं इस कठिन व्रत का इसलिए पालन कर रही थी कि तुम बाकी बारह आदित्यों को मारने के लिए एक पुत्र प्राप्त कर सकूँ।   |   bhagavat अध्याय 6.18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  6.18.69 
अथेन्द्रमाह ताताहमादित्यानां भयावहम् ।
अपत्यमिच्छन्त्यचरं व्रतमेतत्सुदुष्करम् ॥ ६९ ॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात दिति ने इंद्र से कहा- हे पुत्र! मैं इस कठिन व्रत का इसलिए पालन कर रही थी कि तुम बाकी बारह आदित्यों को मारने के लिए एक पुत्र प्राप्त कर सकूँ।
 
Thereafter, Diti said to Indra- O son! I was observing this strict fast so that you could get a son to kill the twelve Adityas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)