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एकदा सा तु सन्ध्यायामुच्छिष्टा व्रतकर्शिता ।
अस्पृष्टवार्यधौताङ्घ्रि: सुष्वाप विधिमोहिता ॥ ६० ॥
अनुवाद
कठोर तपस्या करते-करते अति क्षीण और कमजोर हो जाने के कारण एक बार दिति ने भोजन के बाद मुँह, हाथ और पैर धोना भूलकर ही सन्ध्या के समय सो गई।
Unfortunately, Diti, who had become very weak and frail due to rigorously observing the fast, neglected to wash her face, hands and feet after eating and went to sleep in the evening.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥