नाप्सु स्नायान्न कुप्येत न सम्भाषेत दुर्जनै: ।
न वसीताधौतवास: स्रजं च विधृतां क्वचित् ॥ ४८ ॥
अनुवाद
कश्यप मुनि ने आगे कहा—हे कल्याणी! नहाते समय पानी में कभी न घुसे, कभी क्रोध न करे और न दुष्ट लोगों से कभी बात करें या साथ रखें। कभी भी बिना धुले वस्त्र न पहने और पहले धारण की गई माला को कभी न पहने।
Kashyap Muni further said- O Kalyani! Never enter the water while bathing, never get angry and never talk or associate with evil people. Never wear unwashed clothes and never wear the garland worn earlier.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥