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bhagavat 6.18.14: जब राहु ने छद्मवेश धारण करके देवताओं के बीच अमृतपान किया, तो भगवान विष्णु ने उसका सिर काट दिया। संह्लाद की पत्नी का नाम कृति था। संह्लाद के साथ कृति ने संभोग किया और उस संयोग के फलस्वरूप उसके पंचजन नाम का एक पुत्र उत्पन्न हुआ।   |   bhagavat अध्याय 6.18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.18.14 
शिरोऽहरद्यस्य हरिश्चक्रेण पिबतोऽमृतम् ।
संह्रादस्य कृतिर्भार्यासूत पञ्चजनं तत: ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
जब राहु ने छद्मवेश धारण करके देवताओं के बीच अमृतपान किया, तो भगवान विष्णु ने उसका सिर काट दिया। संह्लाद की पत्नी का नाम कृति था। संह्लाद के साथ कृति ने संभोग किया और उस संयोग के फलस्वरूप उसके पंचजन नाम का एक पुत्र उत्पन्न हुआ।
 
When Rahu was drinking nectar in the midst of the gods in disguise, Lord Hari cut off his head. Sanhlad's wife's name was Kriti. From the union of these two, Kriti gave birth to a son named Panchajan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)