Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.18.11: सर्वप्रथम, दिति के गर्भ से दो पुत्र हुए: हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष। दोनों ही अत्यंत शक्तिशाली थे और दैत्यों और दानवों द्वारा पूजित थे। | bhagavat अध्याय 6.18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दितेर्द्वावेव दायादौ दैत्यदानववन्दितौ ।
हिरण्यकशिपुर्नाम हिरण्याक्षश्च कीर्तितौ ॥ ११ ॥
अनुवाद
सर्वप्रथम, दिति के गर्भ से दो पुत्र हुए: हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष। दोनों ही अत्यंत शक्तिशाली थे और दैत्यों और दानवों द्वारा पूजित थे।
First of all, two sons named Hiranyakashipu and Hiranyaksha were born from Diti's womb. Both of them were very powerful and were worshipped by demons and devils.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥