श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.18.10 
अथ कश्यपदायादान् दैतेयान् कीर्तयामि ते ।
यत्र भागवत: श्रीमान् प्रह्रादो बलिरेव च ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
अब मैं दिति के उन पुत्रों के बारे में बताऊँगा जो कश्यप से उत्पन्न हुए थे, लेकिन जो दानव बन गए। इस दानवीय वंश में महान भक्त प्रह्लाद महाराज और बलि महाराज भी हुए। दानवों को दैत्य इसलिए कहा जाता है क्योंकि वे दिति के गर्भ से उत्पन्न हुए थे।
 
Now I will describe those sons of Diti who were produced by Kasyapa but who became demons. In this demon dynasty appeared the great devotee Prahlada Maharaja and Bali Maharaja. The demons are called demons because they were produced from the womb of Diti.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)