आम इन्सान शारीरिक सम्बन्धों के लिए एकान्त ही पसन्द करते हैं और अपनी पत्नी के साथ एकान्त में ही भोग करते हैं। यह कितनी विचित्र बात है कि इतने बड़े तपस्वी भगवान महादेव जी परम साधुओं की सभा में भी सबको देखते हुए अपनी पत्नी का आलिंगन कर रहे हैं!
Usually, ordinary men embrace and enjoy their wives in private. How surprising it is that such a great ascetic Mahadev is embracing his wife in front of everyone in the midst of a gathering of great sages!
तात्पर्य
महा-व्रत-धार: उस ब्रहमचारी को दर्शाता है जो कभी नहीं गिरा। भगवान शिव को सर्वश्रेष्ठ योगियों में गिना जाता है, जबकि पूज्य संतों के बीच भी उन्होंने पत्नी को आलिंगन दिया। चित्रकेतु ने प्रशंसा की कि भगवान शिव कितने महान हैं जो उस स्थिति में भी अप्रभावित रहे। इसलिए चित्रकेतु अपराधी नहीं थे, उन्होंने केवल अपने आश्चर्य को व्यक्त किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥