श्री शुकदेव जी ने कहा – हे राजन, अपने पति देव के इस वचन को सुनकर देवी उमा (शिव की पत्नी) कि महाराजा चित्रकेतु के व्यवहार से जो विस्मय उत्पन्न हुआ था वह मिट गया और उनकी बुद्धि स्थिर हो गयी।
Sri Sukadeva Goswami said, O King! Upon hearing this conversation from her husband, Goddess Uma (Shiva's wife) became astonished at King Chitraketu's behavior and her mind became stable.
तात्पर्य
श्रीला विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर कहते हैं कि 'शांत-धी' शब्द का अर्थ स्वीया-पूर्व-स्वभाव-स्मृत्या के रूप में होता है। जब पार्वती को चित्रकेतु को शाप देने के अपने पिछले व्यवहार की याद आई, तो वह बहुत ही शर्मिंदा हो गई और साड़ी की आँचल से अपने मुंह को ढँक दिया, यह स्वीकार करते हुए कि उसने चित्रकेतु को शाप देने में गलती की थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥