शिवजी ने कहा- हे सुंदरियों! तुमने वैष्णवों की महिमा देखी है? श्रीभगवान हरि के दासानुदास होकर वे महापुरुष होते हैं और किसी प्रकार के सांसारिक सुख में रुचि नहीं रखते।
Lord Shiva said- O beautiful lady! Have you seen the greatness of Vaishnavas? Being the servants of Shri Bhagwan Hari, they are great men and are not interested in any kind of worldly pleasures.
तात्पर्य
भगवान शिव, पार्वती के पति ने अपनी पत्नी से कहा, "मेरी प्यारी पार्वती, तुम अपने शारीरिक रूप में बहुत सुंदर हो। निश्चित रूप से तुम गौरवशाली हो। लेकिन मुझे नहीं लगता कि तुम उन भक्तों की सुंदरता और महिमा से मुकाबला कर सकती हो जो परम भगवान के सेवकों के सेवक बन गए हैं।" निश्चित रूप से, भगवान शिव मुस्कुराए जब उन्होंने इस तरह अपनी पत्नी के साथ मजाक किया, क्योंकि दूसरे इस तरह बात नहीं कर सकते। "परम भगवान," शिव ने जारी रखा, "हमेशा अपने कर्मों में गौरवशाली हैं, और यहाँ उनके भक्त, राजा चित्रकेतु पर उनके अद्भुत प्रभाव का एक और उदाहरण है। बस देखो, हालाँकि तुमने राजा को शाप दिया था, वह बिल्कुल भी डरा या दुखी नहीं था। बल्कि, उसने तुम्हारा सम्मान किया, तुम्हें माँ कहा और तुम्हारे शाप को स्वीकार किया, खुद को दोषी मानते हुए। उन्होंने जवाबी कार्रवाई में कुछ नहीं कहा। यही एक भक्त की श्रेष्ठता है। तुम्हारे शाप को हल्के में सहन करके, उन्होंने निश्चित रूप से तुम्हारे सौंदर्य और उसे श्राप देने की तुम्हारी शक्ति को पार कर लिया है। मैं निष्पक्ष रूप से यह निर्णय कर सकता हूँ कि इस भक्त, चित्रकेतु ने भगवान के शुद्ध भक्त बनकर तुम्हें और तुम्हारी श्रेष्ठता को हरा दिया है।" जैसा कि श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, 'तरोर अपि सहिष्णुना'। एक पेड़ की तरह, एक भक्त जीवन में सभी प्रकार के शापों और उलटफेरों को सहन कर सकता है। यही एक भक्त की श्रेष्ठता है। परोक्ष रूप से, भगवान शिव ने पार्वती को चित्रकेतु जैसे भक्त को शाप देने की गलती करने से मना किया। उन्होंने संकेत दिया कि यद्यपि वह शक्तिशाली थी, लेकिन राजा ने बिना किसी शक्ति को प्रदर्शित किए, अपनी सहिष्णुता से उसकी शक्ति को पार कर लिया था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥